22 Shayari On Eyes – शायरी आँखों की

shayari

इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं मस्ताने हज़ारों हैं, इक तुम ही नहीं तन्हाँ उल्फ़त में मेरी रुसवा, इस शहर में तुम जैसे दीवाने हज़ारों हैं

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मैं जिसे ओढ़ता-बिछाता हूँ वो ग़ज़ल आपको सुनाता हूँ.
एक जंगल है तेरी आँखों में मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ

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यूँ ही गुजर जाती है शाम अंजुमन में,
कुछ तेरी आँखों के बहाने कुछ तेरी बातो के बहाने

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ये आईने नही दे सकते तुम्हे तुम्हारी खूबसूरती की सच्ची ख़बर,
कभी मेरी इन आँखों में झांक कर देखो की कितनी हसीन हो

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मुझसे जब भी मिलो नजरें उठाकर मिलो,
मुझे पसंद है अपनेआप को तुम्हारी आँखों में देखना

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मेरे बस में अगर होता हटा कर चाँद तारों को
मैं नीले आसमां पे बस तेरी आँखें बना देता

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नींद को आज भी शिकवा है मेरी आँखों से ,
मैंने आने न दिया उसको कभी तेरी याद से पहले

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रात गुजारी फिर महकती सुबह आई ,
दिल धड़का फिर तुम्हारी याद आई.
आँखों ने महसूस किया उस हवा को ,
जो तुम्हें छु कर हमारे पास आई

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अब तो उसे से मिलना और भी ज़रूरी हो गया है
सुना है उसकी आँखों मैं मेरा अक्स नज़र आता है

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सुकून की तलाश में तुम्हारी आँखों में झाँका था,
किसे पता था कम्बखत दिल का दर्द और मिल जाएगा

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चख के देख ली दुनिया भर की शराब की बोतलें,
जो नशा तेरी आँखों में था वो किसी में नहीं

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रातों की गहराई आँखों से उतर आई
कुछ खवाब थे और कुछ मेरी तनहाई
ये जो पलकों से बह रहे हैं हल्के -हल्के
कुछ तो मजबूरी थी कुछ मेरी बेवफ़ाई

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उसने आँखों से आँखें जब मिला दी
ज़िंदगी झूम कर मुस्कुरा दी
ज़ुबान से तो हम कुछ न कह सके
पर आँखों ने दिल की कहानी सुना दी

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सागर से गहरी हैं आपकी आँखें
दिल की खुशी है आपकी आँखें
प्यार का जाम हैं आपकी आँखें
छुपाए कई राज़ हैं आपकी आँखें
ले लेंगी मेरी जान आपकी आँखें

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मैं उम्र भर जिनका न कोई दे सका जवाब,
वह इक नजर में, इतने सवालात कर गये

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वक़्त के हाथ में डोर है
अक्ल इन्सा की कमज़ोर है
जो है क़िस्मत में होगा वही
जानेमन सोचना छोड़ दे

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अपनी आँखों मैं छुपा रखे हैं जुगनू मैंने
अपनी पलकों मैं सजा रखे हैं आँसू मैंने
मेरी आँखों को भी बरसात का मौक़ा दे दे
सिर्फ एक बार मुलाक़ात का मौक़ा दे दे

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एक-सी शोखी खुदा ने दी है हुस्नो -इश्क को,
फर्क बस इतना है कि वो आंखों में है, ये दिल में हैं

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नशीली आँखों से वो जब हमें देखते हैं
हम घबराकर ऑंखें झुका लेते हैं
कौन मिलाए उनकी आँखों से ऑंखें
सुना है वो आँखों से अपना बना लेते है

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पाने से खोने का मज़ा और है,
बंद आँखों से देखने का मज़ा और है,
आंसू बने लफ्ज़ और लफ्ज़ बने गजल,
यादों के साथ जीने का मज़ा कुछ और है

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वो नकाब लगा कर खुद को
इश्क से महफूज समझते रहे
नादां इतना भी नहीं समझते कि
इश्क चेहरे से नहीं आँखों से शुरू होता है

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आपकी आंखें वे शब्द बोलती हैं
जो आपके होंठ कभी नहीं कहते

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